महाशिवरात्रि की रात में शिव से क्या माँगना चाहिए?
सच्ची प्रार्थना क्या है, क्या माँगना उचित है और शिव-कृपा पाने का आध्यात्मिक मार्ग
शिव से क्या माँगें?
महाशिवरात्रि की रात शिव की उपासना की सबसे महत्वपूर्ण रात है। इस रात ब्रह्मांडीय ऊर्जा चरम पर होती है और शिव की कृपा पाने का स्वर्णिम अवसर मिलता है। लेकिन बड़ा प्रश्न है – शिव से क्या माँगना चाहिए? क्या धन, पुत्र, सुख-सुविधाएँ, या कुछ और?
"अर्थः पुमर्थः इति ना। किन्तु चतुर्वर्ग में धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष - सब शिव से माँगे जा सकते हैं, पर सच्चा साधक शिव को ही माँगता है।"
सामान्य माँगें vs सच्ची माँग
| लौकिक माँगें | आध्यात्मिक माँगें |
|---|---|
| धन-दौलत, नौकरी, व्यापार में लाभ | शिव-ज्ञान, वैराग्य, आत्म-साक्षात्कार |
| पुत्र, संतान सुख | शिवत्व की प्राप्ति, मोक्ष |
| सौंदर्य, यश, प्रसिद्धि | निर्मल बुद्धि, भक्ति, प्रेम |
| शत्रुओं का नाश | अहंकार का नाश |
| सांसारिक सुख-सुविधाएँ | आंतरिक शांति, संतोष |
शिव तो भोलेनाथ हैं, जो भी माँगो दे देते हैं। लेकिन कहते हैं – जो शिव से माँगता है, उसे शिव मिल जाते हैं, बाकी सब तो माया है।
पौराणिक कथाएँ: किसने क्या माँगा?
रावण
अमरता, शक्ति, सुवर्ण लंका – पर अहंकार नहीं छोड़ा। मिला भी, पर अंत में नाश हुआ।
मार्कण्डेय
शिव को ही माँगा, शिव में लीन हो गए। मृत्यु पर विजय मिली।
उपमन्यु
शिव से क्षीरसागर में दूध माँगा, पर शिव ने स्वयं उन्हें अपने सान्निध्य का वरदान दिया।
शबरी
कुछ नहीं माँगा, केवल प्रेम दिया। शिव ने उसे अपने लोक में स्थान दिया।
शिव क्या देना चाहते हैं?
शिव साक्षात परमात्मा हैं। वे हर जीव को उसके कल्याण के लिए सबसे उत्तम चीज देना चाहते हैं – मोक्ष, शांति, आत्मज्ञान। लेकिन जब हम छोटी-छोटी चीज़ें माँगते हैं, तो वे वही देकर हमारा भला करते हैं, धीरे-धीरे हमें ऊपर उठाते हैं।
एक बार भक्त ने शिव से कहा – "मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस आपके चरणों में रहने दो।"
शिव ने कहा – "यही सबसे बड़ी माँग है। जो मुझे माँगता है, उसे सब कुछ मिल जाता है।"
सही प्रार्थना क्या है?
- शिव से शिवत्व माँगें – उनके जैसा निष्काम, निर्भय, ध्यानस्थ होना।
- अहंकार के नाश की प्रार्थना करें – "मैं" मिटे, केवल शिव रहें।
- विवेक और वैराग्य माँगें – सत्य-असत्य का ज्ञान, मोह-माया से ऊपर उठने की शक्ति।
- संसार के कल्याण की कामना करें – "सर्वे भवन्तु सुखिनः" की भावना।
- अंत में, केवल शरणागति – "हे शिव, मैं तुम्हारा हूँ, तुम जैसा चाहो वैसा करो।"
महामृत्युंजय मंत्र का भाव
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
यह मंत्र मृत्यु के भय से मुक्ति और अमरत्व की ओर प्रेरित करता है। यह सबसे बड़ी माँग है – भयमुक्त होना, शिवमय होना।
कैसे करें प्रार्थना?
क्या न माँगें?
- किसी का अहित, किसी की हानि – शिव तो अभय हैं, वे कभी दूसरों को नुकसान पहुँचाने वाली माँग पूरी नहीं करते।
- अहंकारपूर्ण माँगें – "मैं सबसे बड़ा बनूँ", "मुझे यश मिले" – ये अहंकार को बढ़ाती हैं।
- नश्वर पदार्थों की आसक्ति – धन, सुख सब नाशवान हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शिव से सीखें, माँगना ही नहीं
शिव स्वयं कभी कुछ नहीं माँगते। वे तो सदा तपस्या में लीन, भस्म लगाए, जटा धारण किए, सब कुछ त्याग कर भी सब कुछ स्वामी हैं। उनसे सीखें – आवश्यकताएँ कम करें, संतोष बढ़ाएँ।
शिव से सच्ची माँग:
"हे शिव, मुझे वह दो जो सदा रहे।
नाशवान चीजें नहीं चाहिए।
मैं खुद ही नाशवान हूँ, मुझे अविनाशी से जोड़ दो।
मैं तुम्हें चाहता हूँ, बस तुम्हें।"
इस महाशिवरात्रि सही माँग करें
शिव से जुड़ें, सही भाव रखें, और देखें कैसे आपका जीवन बदलता है।
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