ॐ कैसे पहली ध्वनि बना?
सृष्टि की आदि-ध्वनि का रहस्य: सनातन ग्रंथों और आधुनिक विज्ञान के समन्वय में
ब्रह्मांड में सबसे पहली ध्वनि क्या थी? आधुनिक विज्ञान के अनुसार बिग बैंग एक विशाल ध्वनि विस्फोट था, जबकि सनातन परम्परा के अनुसार यह ध्वनि थी - ॐ। यह मात्र एक मंत्र नहीं, बल्कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड की मूलभूत स्पंदन ऊर्जा है।
"ओमित्येतदक्षरमिदं सर्वं तस्योपव्याख्यानं
भूतं भवद्भविष्यदिति सर्वमोंकार एव॥
- माण्डूक्य उपनिषद 1.1
"ॐ यह अक्षर ही यह समस्त जगत है। इसका उपव्याख्यान है:
जो कुछ भूत (अतीत), भवत् (वर्तमान) और भविष्यत् (भविष्य) है,
वह सब ॐकार ही है।"
मूल प्रश्न: सृष्टि की पहली ध्वनि क्या थी?
भौतिक विज्ञान का प्रश्न
बिग बैंग के समय उत्पन्न ध्वनि तरंगें कैसी थीं? क्या कोई मूलभूत "ब्रह्मांडीय स्वर" है?
अध्यात्म का प्रश्न
क्या ध्वनि से सृष्टि का आरम्भ हुआ? ॐ कैसे सम्पूर्ण ब्रह्मांड का सार बना?
दार्शनिक प्रश्न
ध्वनि और चेतना का क्या संबंध है? क्या शब्द ही ब्रह्म है?
सनातन दर्शन में "शब्दब्रह्म" की अवधारणा है - ध्वनि ही परब्रह्म का प्रथम प्रकट रूप है। ॐ इसी शब्दब्रह्म का प्रतीक है।
सनातन ग्रंथों में ॐ का वर्णन
वेदों में वर्णन
ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद - तीनों वेदों में ॐ का महत्व बताया गया है। सामवेद तो सम्पूर्ण रूप से संगीत और ध्वनि पर आधारित है, जिसमें ॐ की सर्वोच्च स्थिति है।
प्रणव
ॐ का मूल नाम "प्रणव" - जो प्राण (ऊर्जा) को नव (नया) करे
त्रिमूर्ति स्वरूप
अ (ब्रह्मा), उ (विष्णु), म (महेश) - तीनों देवताओं का समावेश
सर्वव्यापी ध्वनि
सम्पूर्ण ब्रह्मांड में गूँजने वाली मूलभूत स्पंदन ध्वनि
तैत्तिरीय उपनिषद में कहा गया है: "ॐ इति ब्रह्म" - ॐ ही ब्रह्म है। इस एकाक्षर मंत्र में सम्पूर्ण वेदों का सार समाहित है।
उपनिषदों में ॐ का रहस्य
माण्डूक्य उपनिषद
यह सम्पूर्ण उपनिषद केवल ॐ की व्याख्या के लिए समर्पित है। इसमें ॐ के चार मात्राओं (अ, उ, म, और अर्धमात्रा) का विस्तार से वर्णन है:
- अ: जागृत अवस्था, ब्रह्मा, भूः लोक
- उ: स्वप्न अवस्था, विष्णु, भुवः लोक
- म: सुषुप्ति अवस्था, शिव, स्वः लोक
- अर्धमात्रा: तुरीय अवस्था, परब्रह्म, महः लोक
छान्दोग्य उपनिषद (2.23.3)
"ॐ इति एतत् अक्षरम् उद्गीथम् उपासीत"
"ॐ इस अक्षर रूप उद्गीथ (उच्च गान) की उपासना करो।"
यहाँ ॐ को सम्पूर्ण सृष्टि का उद्गीथ (महान गान) कहा गया है।
"यथा सर्वेषु वृक्षेषु रसः सारं समाहितः
एवं सर्वेषु मन्त्रेषु प्रणवः सार उच्यते॥
- गीता व्याख्या
"जैसे सभी वृक्षों में रस ही सार है,
वैसे ही सभी मंत्रों में प्रणव (ॐ) ही सार कहा गया है।"
आधुनिक विज्ञान और ॐ
ब्रह्मांडीय सूक्ष्म तरंगें
NASA के वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांडीय माइक्रोवेव बैकग्राउंड रेडिएशन में एक विशेष प्रकार की ध्वनि तरंगें पाई हैं, जो बिग बैंग के बाद के समय की हैं। यह तरंगें ॐ की स्पंदन प्रकृति से मिलती-जुलती हैं।
विज्ञान और सनातन: आदि-ध्वनि की तुलना
| विषय | आधुनिक विज्ञान | सनातन दर्शन |
|---|---|---|
| प्रारंभिक ध्वनि | बिग बैंग की ध्वनि तरंगें, 1000 करोड़ Hz | ॐ की आदि-ध्वनि, अनाहत नाद |
| आवृत्ति | ब्रह्मांडीय माइक्रोवेव पृष्ठभूमि: 160.2 GHz | ॐ की मूल आवृत्ति: 136.1 Hz (श्रुति) |
| प्रभाव | ध्वनि तरंगों ने आकाशगंगाओं का निर्माण प्रभावित किया | ॐ की ध्वनि से तत्वों (पंच महाभूत) का निर्माण |
| वर्तमान अवस्था | ब्रह्मांडीय पृष्ठभूमि विकिरण में संरक्षित | प्रत्येक प्राणी के हृदय में गूँजता हुआ अनाहत नाद |
| वैज्ञानिक शोध | CMB (Cosmic Microwave Background) अध्ययन | नाद योग, मंत्र विज्ञान, ध्वनि चिकित्सा |
मनुष्य के मस्तिष्क की अल्फा तरंगों (8-13 Hz) और ॐ के उच्चारण से उत्पन्न तरंगों में आश्चर्यजनक समानता पाई गई है, जो ध्यान की अवस्था से मेल खाती है।
सनातन के विभिन्न दर्शनों में ॐ
योग दर्शन
पतंजलि के योगसूत्र (1.27-1.28) में ॐ को ईश्वर का प्रतीक बताया गया है। ॐ के जप से मन की एकाग्रता और चित्त की वृत्तियों का निरोध होता है।
तंत्र दर्शन
ॐ को बीज मंत्रों का बीज माना गया है। तंत्र में ॐ के विभिन्न रूपों (वामाचार, दक्षिणाचार) में उच्चारण की विधियाँ बताई गई हैं।
भक्ति दर्शन
वैष्णव, शैव और शाक्त सभी सम्प्रदायों में ॐ का महत्व है। भगवद्गीता (7.8, 8.13, 9.17) में कृष्ण स्वयं ॐ को अपना ही रूप बताते हैं।
जैन दर्शन
जैन परम्परा में ॐ को पंच परमेष्ठी (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु) का प्रतीक माना गया है।
ध्वनि से सृष्टि: विस्तृत प्रक्रिया
नादब्रह्म से सृष्टि
सनातन सिद्धांत के अनुसार सृष्टि की प्रक्रिया:
- परब्रह्म: शून्य, निर्गुण, निराकार
- नादब्रह्म: प्रथम स्पंदन, ध्वनि का प्रकट होना
- ॐ की ध्वनि: त्रिमूर्ति का एकीकृत स्वरूप
- बीज मंत्र: ॐ से विभिन्न बीज मंत्रों का उद्भव
- तन्मात्राएँ: शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध
- महाभूत: आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी
- ब्रह्माण्ड: सम्पूर्ण ब्रह्मांड की रचना
विज्ञान में ध्वनि से निर्माण
आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि ध्वनि तरंगों का पदार्थ पर प्रभाव पड़ता है:
- साइमैटिक्स: ध्वनि तरंगों से बनने वाले ज्यामितीय आकार
- रेत पर प्रभाव: विभिन्न आवृत्तियों पर रेत के विभिन्न पैटर्न
- जल स्मृति: ध्वनि का जल के आणविक संरचना पर प्रभाव
- मंत्र विज्ञान: विशिष्ट मंत्रों के शरीर और मन पर प्रभाव
ॐ और ब्रह्मांडीय चक्र
सृष्टि में ॐ
ब्रह्मा द्वारा ॐ का उच्चारण और सृष्टि का प्रारम्भ
स्थिति में ॐ
विष्णु द्वारा ॐ के जप से ब्रह्मांड का संचालन
संहार में ॐ
शिव के डमरू से निकलती ॐ की ध्वनि और प्रलय
प्रत्येक कल्प (ब्रह्मा का दिन) के प्रारम्भ में ब्रह्मा ॐ का उच्चारण करते हैं और सृष्टि प्रक्रिया शुरू होती है। कल्प के अंत में शिव के डमरू से निकलने वाली ॐ की ध्वनि से प्रलय होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ब्रह्मांडीय पृष्ठभूमि विकिरण: NASA के WMAP उपग्रह ने ब्रह्मांडीय ध्वनि तरंगें रिकॉर्ड की हैं
- 136.1 Hz आवृत्ति: यह आवृत्ति ॐ के उच्चारण से मेल खाती है
- अनाहत नाद: योगियों द्वारा गहन ध्यान में सुनी जाने वाली आंतरिक ध्वनि
- वैज्ञानिक शोध: स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोध में ब्रह्मांडीय ध्वनि और ॐ में समानता पाई गई
- अल्फा तरंगें बढ़ती हैं: ध्यान और शांति की अवस्था
- तनाव हार्मोन कम होते हैं: कोर्टिसोल का स्तर घटता है
- सेरोटोनिन बढ़ता है: खुशी का रसायन
- मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्ध सिंक्रनाइज़ होते हैं: संतुलित मानसिक अवस्था
- प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है: रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
- हृदय गति स्थिर होती है: नियमित और शांत हृदय गति
- साइमैटिक्स: ध्वनि तरंगों से पदार्थ के ज्यामितीय पैटर्न बनते हैं
- क्वांटम भौतिकी: सब कुछ ऊर्जा का कंपन है, ध्वनि भी ऊर्जा का एक रूप
- पानी पर प्रयोग: ॐ के उच्चारण से पानी के क्रिस्टल सुंदर आकार लेते हैं (मासारु एमोटो के शोध)
- मंत्र विज्ञान: विशिष्ट मंत्रों के पौधों की वृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव
- शास्त्रीय वर्णन: सनातन ग्रंथों में शब्दब्रह्म से ही तत्वों का निर्माण बताया गया है
- आसन: सुखासन या पद्मासन में बैठें, रीढ़ सीधी
- श्वास: गहरा श्वास लें, फिर धीरे-धीरे छोड़ें
- अ: कंठ से, 2 सेकंड तक
- उ: मुख के मध्य से, 2 सेकंड तक
- म: होंठ बंद कर, नाक से ध्वनि, 2 सेकंड तक
- अर्धमात्रा: मौन, 2 सेकंड तक
- प्रातः जागरण के तुरंत बाद 21 बार ॐ का जप
- ध्यान से पहले 108 बार माला जप
- भोजन से पहले 3 बार ॐ का उच्चारण
- सोने से पहले 11 बार ॐ का जप
- संकट के समय ॐ का निरंतर जप
- माण्डूक्य उपनिषद - ॐ पर सम्पूर्ण उपनिषद
- छान्दोग्य उपनिषद (अध्याय 2) - उद्गीथ के रूप में ॐ
- तैत्तिरीय उपनिषद - ॐ इति ब्रह्म
- योगसूत्र (पतंजलि) - समाधि के लिए ॐ
- भगवद्गीता (अध्याय 7, 8, 9, 10, 17) - कृष्ण द्वारा ॐ का वर्णन
- शिव सूत्र - शैव दर्शन में ॐ
- "दि पॉवर ऑफ़ ओम्" - स्वामी शिवानन्द
- "ओम्: दि सीक्रेट ऑफ़ आभर बीइंग" - एम. सी. अय्यर
- "साइंस ऑफ़ मंत्र एण्ड ओम्" - डॉ. एच. आर. नागेन्द्र
- शुद्धता: जप से पहले शारीरिक और मानसिक शुद्धता आवश्यक
- संख्या: विषम संख्या में जप करें (3, 11, 21, 108)
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4-6) सर्वोत्तम
- स्थान: शांत, स्वच्छ और पवित्र स्थान पर बैठें
- भावना: यांत्रिक उच्चारण न करें, भावपूर्ण जप करें
- अहंकार: जप करते समय अहंकार का त्याग करें
- नियमितता: नियमित अभ्यास ही लाभ देता है
- गुरु मार्गदर्शन: यदि संभव हो तो गुरु के मार्गदर्शन में जप करें
प्रायोगिक ध्यान: ॐ के साथ एकत्व का अनुभव
ॐ ध्यान विधि
प्रारंभिक स्थिति
सुखासन में बैठें, आँखें बंद करें, शरीर ढीला छोड़ दें। 5 मिनट श्वास पर ध्यान केंद्रित करें।
बाह्य ॐ जप
मधुर स्वर में ॐ का 21 बार उच्चारण करें। प्रत्येक उच्चारण के बाद मौन रहें और ध्वनि के कंपन को अनुभव करें।
मानसिक ॐ जप
बिना स्वर निकाले, मन ही मन ॐ का जप करें। मस्तिष्क के मध्य भाग (आज्ञा चक्र) पर ध्यान केंद्रित करें।
अनाहत नाद सुनना
कानों को अंगुलियों से बंद करें। भीतर गूँजती हुई ध्वनि सुनने का प्रयास करें। यही है अनाहत नाद।
ब्रह्मांडीय ॐ का ध्यान
कल्पना करें कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड ॐ की ध्वनि से गूँज रहा है। आप भी उसी ध्वनि का अंश हैं।
एकत्व का अनुभव
ॐ की ध्वनि में अपने व्यक्तित्व का विलय होता हुआ अनुभव करें। "अहं ब्रह्मास्मि" का भाव जाग्रत करें।
अंतिम सत्य: ॐ ही सब कुछ है
जब हम समझते हैं कि:
"ॐ ही भूत है
ॐ ही भविष्य है
ॐ ही वर्तमान है
और ॐ ही इन तीनों से परे है
ॐ ही बाहर है
ॐ ही भीतर है
और ॐ ही वह है जो दोनों को जोड़ता है
ॐ की इस अनुभूति में ही
सभी द्वंद्व समाप्त हो जाते हैं
और शांति का साम्राज्य स्थापित होता है।"
आज से ही शुरू करें
प्रतिदिन ॐ के जप और ध्यान का अभ्यास करें। इस आदि-ध्वनि में छुपे ब्रह्मांड के रहस्य को स्वयं अनुभव करें।
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